Saturday, March 22, 2014

जय बनारस ...

कोई नहीं समझ पाया है, महिमा अपरम्पार बनारस।
भले क्षीर सागर हों विष्णु, शिव का तो दरबार बनारस।।
हर-हर महादेव कह करती, दुनिया जय-जयकार बनारस।
माता पार्वती संग बसता, पूरा शिव परिवार बनारस।।
कोतवाल भैरव करते हैं, दुष्टों का संहार बनारस।
माँ अन्नपूर्णा घर भरती हैं, जिनका है भण्डार बनारस।।
कण-कण शंकर घर-घर मंदिर, करते देव विहार बनारस।।
एक बार जो आ बस जाता, कहता इसे हमार बनारस।
भंगी यहाँ ज्ञान देता है, ज्ञानी जाता हार बनारस।।
एक लंगोटी पर देता है, रेशम को भी वार बनारस।
सुबहे-बनारस दर्शन करने, आता है संसार बनारस।।
सारनाथ ने दिया ज्ञान का, गौतम को उपहार बनारस।
भारत माता मंदिर बैठी, करती नेह-दुलार बनारस।।
नाग-नथैया और नक्कटैया, लक्खी मेले चार बनारस।
मालवीय की अमर कीर्ति पर, जग जाता, बलिहार बनारस।।
पाँच विश्वविद्यालय करते, शिक्षा का संचार बनारस।
गंगा पार से जाकर देखो, लगता धनुषाकार बनारस।।
राँड़-साँड़, सीढ़ी, संन्यासी, घाट हैं चन्द्राकार बनारस।
पंडा-गुन्डा और मुछमुन्डा, सबकी है भरमार बनारस।।
छनै जलेबी और कचौड़ी, गरमा-गरम आहार बनारस।
छान के बूटी लगा लंगोटी, जाते हैं उस पार बनारस।।
हर काशी वासी रखता है, ढेंगे पर संसार बनारस।
धर्म, अर्थ और काम, मोक्ष का, इस वसुधा पर द्वार बनारस।।


-प्रशांत यादव 

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